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मेरा सुनहरा सपना

Rashmi Porwal

Rashmi Porwal

अन्य

October 26, 2017

सपने में सपना देखा
अपनी मौत का सपना देखा
अपनी मौत को करीब से देखा…
कफ़न में लिपटे तन को देखाअपने जलते बदन को देखा…..हाथ बांधे लोगों को देखा
कतार में खड़े लोगों को देखा कुछ परेशान चेहरों को देखा
कुछ उदास चेहरों को देखा कुछ छुपा रहे अपनी मुस्कान थे
इस रगंमचं की दुनिया से हम अनजान थे
दूर खड़ी मैं देख रही थी उनके जज़्बात समझ रहा थी. तभी किसी ने हाथ बढ़ा दियाथा अपने हाथों में हाथ थाम लियाथा मैंने भी मुड़कर उसको देखा जिसने मुझको थाम लिया था देख उस को मैं बड़ा हैरान थी जो कल तक आस पास के लोगौं की बातों की भय से मेरे साथ चलने से डरता था आज उसके हाथों में मेरा हाथों था…आंखों में स्नेह था चेहरे पर मुस्कान थी
न अब किसी का डर,भय था
जान जब देखा मैंने उसको जिज्ञासा से वो हँस कर बोला मै….अपनी बेवक़ूफ़ियो पर ये सोच कर हैरान हूँ….. …तभी खुली आँख मेरीमै बिस्तर पर विराजमान थी…..कितना थी नादानमैं हकीकत से अनजान थी
मेरा सुनहरा सपना

Author
Rashmi Porwal
kisi ki khushi ke sath Khush rehna sbse bda khushi ka kam h
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