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मेरा साया

Beena Lalas

Beena Lalas

कविता

May 20, 2016

अंधेरे में नही होता मेरा साया मेरे पास तब मुझे होता है मेरे होने का अहसास
उजाले में जब घटता -बढता है मेरे साये का आकार
उद्वेलित हो उठते हैं मेरे मन में मेरे लिये मेरे ही विचार
मन कहता है कि ये साया है एक नारी का, जिसका न कोई अस्तित्व ना कोई पहचान है
कर दिए जाते हैं चसपे रिश्ते इसपे और दे दिए जाते सौ नाम है
दिन के उजाले में मुश्किल होता है इन नामों के साये में जीना
क्योंकि हर रिश्ता कहता है कि तुम एक नारी हो तुम्हे ये है मना और ये नहीं करना
सारी हदें तय है तुम्हारे लिये तुम्हे नही है लांघना
तब चिढाता है मुझे मेरा बोना आकार मगर तभी कहता है मेरा विशाल मना
ना करो तुम साये का विश्वास ना डरो तुम साये से और ना ही साये की तरह रखो डर को मन में
करो मजबूत अस्तित्व अपना बनाओ वजूद स्वयं अपना
मिलेगा अस्तित्व तुम्हे भी एक इंसान जितना ….
मिलेगा अस्तित्व तुम्हें भी एक इंसान जितना …।

Author
Beena Lalas
पति का नाम --खेम सिंह लालस शिक्षा --हिंदी स्नातकोत्तर MA भूतपूर्व आल इंडिया रेडियो एडवाइजर कमेटी मेंबर ईवेंट मेनेजर कविताये और हास्य व्यंग्य लिखती हूँ
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