कविता · Reading time: 1 minute

मेरा सदग्रंथ.…….सौदा-ए-जज्बात

चाहत की दस्तक को पैरों तले ना रोध दे बेमेल से शब्द, आओ सनम खोमोशियो का सौदा करें ।

ख्वाईशो की रूह से लिपटी जिन्दी मोत सी तलखतर ना हो जाए, आओ सनम बे-परवाही का सौदा करें ।

हर तरफ बिखर ना जाए यादों की तस्वीरें , आओ सनम आज मे जीवन के प्रति पल का सौदा करें ।

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