.
Skip to content

मेरा विचार —

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

February 19, 2017

(1) ????
मुझे जो करना है,
तो करना है।
समय निकल ही जाता है।
कमी समय की नहीं,
सोचने की होती है।
????

(2) ????
यह हम पर निर्भर है,
कि हम कितने आशावान हैं,
और कितने निराशावान।
????—लक्ष्मी सिंह ??

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
Recommended Posts
ग़ज़ल( समय से कौन जीता है समय ने खेल खेले हैं)
ग़ज़ल( समय से कौन जीता है समय ने खेल खेले हैं) अपनी जिंदगी गुजारी है ख्बाबों के ही सायें में ख्बाबों में तो अरमानों के... Read more
तुझे कबूल इस समय
परिस्थितियाँ नही है मेरी माकूल इस समय तू ही बता कैसे करूँ तुझे कबूल इस समय || इशारो मे बोलकर कुछ गुनहगार बन गये है... Read more
कितने ठहराव रहे जिन्दगी के मगर हम चलते रहे। देख साहिल दूर से हम भँवर में मचलते रहे। कितने खामोश किस्से रेत बन आँखों में... Read more
चलो चले हम, गाँव चले हम! आओ चले हम, गाँव चले हम! ये झुटी नगरी, छोड़ चले हम! ये झुटे सपने, तोड़ चले हम! चलो... Read more