शेर · Reading time: 1 minute

मेरा वतन

दिलो जान से चाहता हूँ मैं अपने वतन को ,
छीन नही सकता कोई मुझसे मेरे इस चमन को,
लूटता है वतन को वही जो अनजान होता है,
गाली देता है वतन जो बदजबान होता है,
काट के रख दूँगा उसकी जुबाँ को जो गाली देता है वतन को,
मरने के बाद फूल नही देगा कोई माली भी उसके तन को,
ऐसा होता है उसके साथ जो गद्दार होता है,
देशभक्त वही होता है जो ईमानदार होता है.

– सचिन यादव

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