कविता · Reading time: 1 minute

मेरा यार है वो

खुदा ने जो भी दिया मुझे
उसमे सबसे नायाब है वो
मैं तो तप रहा था मरु की तरह
वो आसमां से आती बूंदों का
बौछार है वो
टूट कर बिखरने लगा था मै
वो मुझे समेटने आया
मेरा यार है वो
दम घुटने लगी थी जब ज़िन्दगी
आकर नयी साँसे भर गया वो
ओझिल दिख रही मंजिल को देखने
मेरी आँखों मे नयी रौशनी भर रहा वो
खत्म हो गयी थे गीत सारे
वो ज़िन्दगी का नया राग है वो
मैं मझधार में फंसा था
वो किनारे लगाने वाला
मेरी नैया का खेवनहार है वो
मेरे दर्द का इल्म रहता है उसे
मेरी खामोशी उसे सोने नही देती
क्या वो कोई खुदा
या खुदा का भेजा बंदा है
या सिर्फ मेरा यार है वो—अभिषेक राजहंस

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