मुक्तक · Reading time: 1 minute

* मेरा मन मचल गया *

अब मेरा मन मचल गया
अब मेरा दिल फिसल गया
मेरे हाथ से कब पता नहीं
सम्भला , गिरकर टूट गया ।।
?मधुप बैरागी

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