गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मेरा भारत

विधा—गीतिका
आधार छंद —- दिग्पाल
मापनी—-221 2122 221 2122
समान्त—-आना, अपदान्त
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भारत विशाल को है गौरवमयी बनाना।
राहें नही सरल पर सम्मान है दिलाना।

बाँटा नही खुदा ने हम खुद ही बाँटते हैं।
धर्मों व जातियों के भेदों से’ है बचाना।

माता पिता कि आशा है देश भक्त जन्मे।
होंगें न देशद्रोही विश्वास है जगाना।

द्रोही यही रहेंगें असहिष्णु लोग होंगें।
धिक्कारते अभागों को देश से भगाना।

सोती नही हमारी तैनात बीर सेना।
सम्मान मान देकर दिल उनके’ है रिझाना।
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नीरज पुरोहित घोलतीर(रूद्रप्रयाग)उत्तराखंड

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