कविता · Reading time: 1 minute

मेरा भारत महान ।

आओ मिल कर नीव रखे , एक ऐसे हिंदुस्तान की । सारे जहाँ में चर्चा हो , मेंरे भारत देश महान् की ।।

आत्म निर्भर देश हो मेरा,
हर दिन हो एक नया सवेरा ।
आपस में हो भाई -चारा,
एक दूजे का बने सहारा।
कृषि प्रधान हे देश मेरा , यहाँ इज्जत हो किसान की,
आओ मिलकर नीव रखे…।।

शिक्षित हो हर भारतवासी,
दिल्ली हो, या हो काशी ।
भ्रस्टाचार का नाम ना हो,
चोरी का फिर काम ना हो।
यु एस यु के रस्क करे , और नींद उड़े जापान की,
आओ मिलकर नीव रखें…।।

हर एक हाथ को काम मिले,
मजदूरो को सम्मान मिले।
वो ही काटे जैसा बोये,
कोई गरीब भूखा ना सोये।
अस्त्र शस्त्र स्वम बनाये,
जय बोलो विज्ञान की,
आओ मिल कर नीवं रखे…..//

सब माँ बहनो को मान मिले,
गीता का सच्चा ज्ञान मिले,
हरा भरा भारत हो मेरा,
जहाँ ऋषि मुनि डाले हो डेरा।
पीछे मत हटना भारत वालो,
तुम्हे सौगन्ध हैं भगवान की,
आओ मिल कर नीवं रखे…..।।

रचनाकार :- जगदीश गुलिया

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