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मेरा बचपन

Shubha Mehta

Shubha Mehta

कविता

October 20, 2016

वो बस्ता लेकर भागना
सखी सहेलियों से
कानाफूसियाँ
भागदौड में
चप्पल टूटना
नाश्ते के डब्बे
कपड़ो पर स्याही के धब्बे
माँ से छुपाना
ओक लगाकर पानी पीना
खेल की छुट्टी में
बेतहाशा दौड़ना
घुटनों को तोडना
कपड़ों की बाँह से
पसीना पोंछना
किराए की साईकल
के लिए लडना -झगडना
छुप्पन-छुपाई ,गिल्ली -डंडा
सितौलिया ,भागमभाग
न ट्यूशन का टेंशन
न पहला नंबर लाने का झंझट
कितना प्यारा था मेरा बचपन
अब इस आधुनिकता की दौड़ में
कहाँ खो गया ये सब
आज के बच्चों का तो
जैसे छिन सा गया बचपन ।

Author
Shubha Mehta