Jan 2, 2019 · कविता
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मेरा प्यारा बचपन

मुझको बतलाओ दिन वो कहाँ खो गए,
मेरे कागज़ के नैया कहाँ खो गए,

चिड़ियो की तरह वो चहचहाना मेरा,
और यहाँ से वहाँ दौड़ लगाना मेरा
मेरे बचपन के यादें कहाँ खो गए,
मुझको बतलाओ वो दिन कहाँ खो गए!!

हर तरफ था मेरी ज़िंदगी में खुशी,
न था कोई भी गम और न कोई दुखी,
मेरे बीते वो पल फिर कहाँ खो गए,
मुझको बतलाओ दिन वो कहाँ खो गए,

गुड्डों गुड़ियों पे एक कहानी बनी थी
मैं बना शाह था वो भी रानी बनी थी
वो गुड़ियों के गुड्डे कहाँ खो गए
मुझको बतलाओ दिन वो कहाँ खो गए!!

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Shah Alam Hindustani
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