गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मेरा तू नही

जिदंगी दे रही तो सजा तू नही
के मुहब्बत है एकतेरफा तू नही

प्यारे मजबूरी होती जुदा तू नही
टहलते टहलते मै यहॉ तू नही

दिल कहता करू तुझ पर मै यकीं
होगी मजबूर पर बेवफा तू नही

राहे आसान होती है सब संग तेरे
मुश्किले जाती बड जब मेरा तू नही

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