Jun 26, 2017 · कविता
Reading time: 1 minute

मेरा जीवन (कविता)

मेरा जीवन (कविता)

यह जीवन भी कोई जीवन है ,
जैसे पेड़ से टुटा हुआ फूलें।
जिसे जब चाहे कोई भी ,
कुचल कर चला जाता है ।
जैसे कोई श्मशान भूमि ,
जहाँ कोई नहीं जाता मरण से पहलेें।
या कोई टुटा हुआ साज़ ,
ना जाने कौन इसे बजा कर ,
फिर तोड़कर फेंक गया ।
इस तरह एक तन्हा से जीवन में,
मसली, कुचली हुई अभिलाषाएं,
कुछ टूटे हुए सपने लिए ,
आ पहुंची हूँ जीवन-मरण के मध्य ,
एक कटी हुई पतंग की तरह।

1 Comment · 367 Views
#14 Trending Author
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा... View full profile
You may also like: