मेरा जीवन (कविता)

मेरा जीवन (कविता)

यह जीवन भी कोई जीवन है ,
जैसे पेड़ से टुटा हुआ फूलें।
जिसे जब चाहे कोई भी ,
कुचल कर चला जाता है ।
जैसे कोई श्मशान भूमि ,
जहाँ कोई नहीं जाता मरण से पहलेें।
या कोई टुटा हुआ साज़ ,
ना जाने कौन इसे बजा कर ,
फिर तोड़कर फेंक गया ।
इस तरह एक तन्हा से जीवन में,
मसली, कुचली हुई अभिलाषाएं,
कुछ टूटे हुए सपने लिए ,
आ पहुंची हूँ जीवन-मरण के मध्य ,
एक कटी हुई पतंग की तरह।

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