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मेरा गांव मेरा पहचान

Sep 20, 2019 04:29 PM

ऋषियों मुनियों की पावन धरती तमसा तट पर बसा मेरा नगर जो अपने आप में एक अद्भुत और अलौकिक अंतरिम ऊर्जा शक्ति का स्रोत्र का खदान कहे जाने वाला शहर हमारा आजमगढ़ उत्तर प्रदेश,जो स्वयं के अद्भुत आवरण के रूप में स्वतः विकसित संरक्षित परिपूर्ण स्वर्णिम स्वरूप में दिख रहा है, तमसा के तट से पंद्रह किमी(पांच कोस)दूर मेरा एक छोटा सा गांव सेवटा जहां पर मेरा गृह निवास है,मैं जब से अपना होश संभाला हूं,अपने गांव को अपने शहर को अपने आस-पास को अपने आप से प्रेम करता हुआ वातावरण पाया हूं,अपने दादा दादी माता जी से अपने गांव के बड़े बुजुर्गों की कर्म गाथा का वर्णन सुना है,और आज का वातावरण हम स्वतः अपनी आंखों से देख रहा हूं दोनों की तुलना जमीन आसमान के भाती प्रदर्शित नजर आती है,जैसे-जैसे विज्ञान की आधुनिक खोज हुई,उसी तरह हर एक गांव में मानवता की गगरी फूट रही है,,मेरे ही नहीं शायद आर्यवर्त के समक्ष गांव का यही हालत हो सकता है,जहां मानवता विश्वास न हो,वहां विकास संसाधन तो मिल सकता है,परंतु मानव का दुख का पराभरण नहीं हो पा रहा है,पहले की बुजुर्ग महान आत्मा के महा पुरुष थे,जो स्वयं को कभी भी देवता नहीं समझे,लेकिन वह महापुरुष स्वयं देवताओं के रुप थे,आज के मानव तो धन के बल पर अपने आप को ही भगवान की उपाधि दे डाली है,वे जानते हैं कि मैं जो कर रहा हूं,यह मानव समाज हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए गलत नसीहत है,परंतु आंखों पर क्रूरता का अवैध पट्टी बांधे तत्कालीन गतिविधियों को महत्व दें,अपने इलाका में अपनी एक अलग ही पहचान बना रहे हैं,और आने वाली पीढ़ी को गर्त में जाने का रास्ता का निर्माण कर रहे हैं,जिस पर स्वयं के साथ अपने आने वाली पीढ़ी के विनाश की पहचान बनाकर स्वर्ण अक्षरों में इसी मानव समाज में सभी के मुख से इनकी कहानी का निर्माण का बखान गाया,सुनाया जाएगा, मानव समाज ज्ञान की गाथा देख सुन पढ़ने के बाद भी,फिर कोई दूसरा व्यक्ति इस गद्दी को धारण कर कसम झूठा वादा का वचन लेकर,इस समाज को लूटना प्रारंभ करेंगा,समाज के बहन/बेटियों के साथ दुराचार दुर्व्यवहार करके समाज में अनैतिकता का प्रभाव बढ़ा कर अपने नए कीर्तिमान का पहचान बनाने में कामयाबी पर मदिरा-पान इत्यादि के साथ जश्न मना उच्च कृर्तिमान का पहचान बनायेंगे,
इसी समाज में कोई सज्जन महान पुरुष एक कल्प वृक्ष के तरह बढेगा और दुराचारी को रोकेगा,आवाज़ उठाएगा,इन अनैतिक चारियों से लड़ने के लिए धर्म के दरबार का दरवाजा खट-खटाएगा,लेकिन उसे मिलेगा असत्य अधर्म का अन्याय का प्रसाद,जो कुछ दिन इस समाज में कानों से सुना,मुंह से कहा जाएगा,कि सत्य के लिए लड़ने वाला व्यक्ति आज अधर्म के हाथों मारा गया और हताश हो आत्महत्या कर लिया,इस प्रकार सच्चाई की पहचान एक दुर्बल निरंकारी अभिचारी के रूप में इस समाज में स्थापित हो जाता है और यह समाज के मानव सत्य का साथ न देकर अपने आप के साथ अपने पूर्वजों पर भी कलंक का दाग तो लगा ही रहे हैं,साथ में अपने आने वाले पीढ़ी को दागी वस्त्र का आवरण का अपरिशुद्धता का समाज इनको शोपने का अप्रतिकूल फल प्रदान कर रहे हैं,इनकी लालच इन के विनाश का पूर्णतः अनकूलतम् साधन बन चुकी है,और उनका विनाश बीज स्वतः के मस्तिष्क में फूट चुका है,कईयों के तो यह एक पौधे वृक्ष का रूप धारण कर चुका है,जो इनकी पहचान का मूल आधार बन गया है
मैं इस कथा में “मेरा गांव मेरी पहचान” पे एक छोटा सा झलक प्रस्तुत कर रहा हूं,जो एक लेखक के आगमन के गाथा का सत्य सौहार्दपूर्ण कहानी आपके सम्मुख पहचान कराता हूं,हमारे गांव को हमारे पूर्वज पौहारी बाबा ने चंद्रभान पुर से आकर बसाया उन्होंने गांव में पाँच पोखरे का निर्माण रास्ते के पग-डंडी का निर्माण,पाठशाला का निर्माण किया,सेवटा गांव को बसा,अपने संतानों को नया आसरा दिया,जिनका पूरा गांव वंशज है,पूर्व से पटहुआ पश्चिम से गम्भीरबन उत्तर से धर्मपुर सोनापुर,दक्षिण से अकबेलपुर बदनपुर मध्य में सूरजपुर गांव विराजमान है,चांद मुकुट सेवटा मोड़, माता रानी गांव के मध्य विराजमान है,शिव पंडाल की महिमा अपरंपार है,डीह-काली पर जन जन का विश्वास है,लखन दईया सिवान बाबा सुदर्शन विद्यालय का स्थान है,कालका कन्या विद्यालय बटवारी सिवान का मूलाधार पहचान है, प्राथमिक विद्यालय सेवटा अपने गांव के लिए गर्वता की शान सम्मान है,हनुमान मंदिर उत्तर पंडित जी के पूरा का पहचान है, सीसपुरा सीवान आज भी बागो की खदान है,डॉक्टर सतीश चंद्र घाट पुरखों की निशानी का अनूठा अभिमान है, पंडित देव नारायण मार्ग सी-सी निर्माण है, लेखक का कर्तव्यता परायणता गांव से ही मेरी पहली पहचान है
सेवटा एक विकसित शिक्षित सभी प्रकार से संपूर्ण गांव है, जो मेरे जन्म के पहले से है,सेवटा गांव अपने क्षेत्र में अपने आप के प्रभाव से विकसित जाना जाता है,क्षेत्र के पच्चीस गांव में इस गांव की चर्चा हर एक व्यक्ति के मुखों पर थी,यहां शिक्षा का संपूर्ण विकास पंडित स्वर्गीय श्री हरगुन मास्टर पंडित स्वर्गीय श्री कवलदेव मास्टर,स्वर्गीय श्री देव नारायण पांडेय स्वर्गीय डॉक्टर रमाकर पांडेय, स्वर्गीय श्री राम प्रसाद पांडेय (प्रधान बाबा) पंडित स्वर्गीय मंगला पांडेय,स्वर्गीय श्री राम रूच विश्वकर्मा,स्वर्गीय श्री अगराम गोड़,हमारी हरिजन बस्ती जो मिलकर एक सुदृढ़ शक्ति का समृद्धि गांव का निर्माण किया यहां के बच्चों में एक लगन थी,शिक्षा के प्रति जो सभी गांव वालों के मन को जीत लेती है, तब का समय भी अजीब था कि गांव में डाका बहुत पडता था पूरा गांव पहरा देता था,डाका तो गांव के कुछ लोगों के मिली भगत से होती थी,और गांव का वह घर बर्बाद हो जाता था,सेवटा में सात पुरा है,जो हमेशा एक दूसरे को,एक साथ हर कार्य में सहायता प्रदान करने को तत्पर रहते है,लेकिन समय अपने चक्र गति से चलता चला चल रहा था और गांव में बढ़ती जनसंख्या विकास अहम व्यक्ति को नासूर बन अपने आप को अपने गांव से अलग करते गए,नए आधुनिक का विकास पंडित स्वर्गीय श्री गंगादीन पांडेय ने गांव में बिजली लाकर गांव को रोशनी से गांव को उजाला कर दिया और विकास की नींव को प्रगण बनाकर विकास की गति को तीव्र किया,इस सराहनीय कार्य के लिए पंडित स्वर्गीय गंगादीन पांडेय जी को पूरा गांव आधुनिक विकास की रेलगाड़ी का इंजन बताता है, ऐसे महापुरुष को मैं प्रणाम करता हूं उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प करता हूं उनकी यह कार्यशैली एक पहचान के रूप में उन्हें अमर करती है…!
एक समय गांव में सूखा पड़ गया,दो वर्ष तक वर्षा तक नहीं हुई,तो गांव में फसल बर्बाद हो गई अनाज नाम मात्र का हुआ,उस साल विकास-खंड की तरफ से गांव को सरकारी ट्यूबवेल मिला जिससे पूरे गांव सेवटा में हर्ष हुआ,कि सूखा पे भी हमारे खेत में अनाज पैदा होगा,लेकिन गांव के महान महानायक ने सभी के खुशी पर ग्रहण लगा कर सरकारी ट्यूबेल को गांव में नहीं लगने दिया,जिसके लिए इस महानायक का गांव के ईमानदार सज्जन पुरुष ने विरोध भाव का पहचान किया और यही अभिशाप खान-दानी विनाश रूप का विस्फोट हुआ परिवार बिखर गया,लेकिन उस महानायक की एक आदत उन्हें पुण्य का अन्य देवता का भगवान के रूप में जानती थी,जिसके द्वार से कभी भी कोई खाली हाथ नहीं लौटता,वह महानायक वटवृक्ष के भाती गांव में स्वतः स्वयं की पहचान बनाने के लिए इस महानायक को सहृदय प्रणाम करता हूं ,पंडित स्वर्गी श्री राम प्रसाद पांडेय (प्रधान बाबा) जब से गांव के प्रधान बने मरते दम तक प्रधान बने रहे गांव का विकास में गांव को कच्ची सड़कों से खड़ंजा बरात घर का निर्माण कराया और अपने अंत समय अपने स्वयं के राम मड़ैया घर में अंतिम यात्रा पर प्रस्थान किया, गांव में एक विचारधारा ,न्याय सेवक के रूप में अपना पूरा जीवन सेवटा को समर्पित किया उनका समर्पण उनका पहचान बना इस समर्पण के लिए प्रधान बाबा को नतमस्तक प्रणाम करता हूं,स्वर्गीय पंडित बुद्धि सागर पांडेय जी को गांव में एक विशेष ज्योतिषाचार्य के रूप में जाने जाते हैं जो हमारे समय में भी थे,इनकी भविष्यवाणी बहुत ही सटीक होती थी,अपने सटीक भविष्यवाणी के लिए जाने जाते हैं मैं उनके ज्ञान को प्रणाम करता हूं,
गांव में जो मध्यम वर्ग के हैं और हमेशा गांव को अपने परिवार को करते रहते थे जो अपनी जमीन को भी उन्हें दान दिया जिनके घर वाले किसी कारण वश बाहर कर देते थे,उनको अपने जगह स्थान दिया और उन्हें गांव में रहने का अवसर दिया,लेकिन वही व्यक्ति आज उनके एहसान को भूल कर एहसान फरामोश की पहचान अपने माथे पर लेकर घूम रहे हैं,फिर भी वह अपने को जमीदारी का शान समझते है, दूसरों का दखल कर क्या कोई शान दिखाएं, वह तो अपने आप के अहंकार में स्वतः रात्रि के समय बिस्तर पर एक घुटन महसूस करता होगा कि इतने बड़े पाप का बोझ लेकर क्या मैं धर्म की पहचान का सौहार्द कर रहा हूं, या अपने पूर्वजों पर कलंक की मिट्टी का तिलक का पहचान का इतिहास बना रहा हूँ…!
हां मैं कवि आज कह रहा हूं कि मैं आज जो कुछ भी हूं अपने गांव के आदर्श से हूँ, गांव के पाठशाला के ज्ञान मंत्र से हूँ,बड़े बुजुर्ग के कर्म के कथा के परिणाम से हूँ, गांव के सौंदर्य पर्यावरण,तालाब पेड़,सड़क पूर्वजों के कथनात्मक कार्यशैली के प्रभाव से मैं आज आप सबके सम्मुख हूँ, हर गांव में गुण अवगुण उपस्थित होते हैं,लेकिन व्यक्ति को क्या ग्रहण करना है,उसके परिवार के आदर्श संस्कार उसके संस्कार और उससे बड़ी बात व्यक्ति का विचार है,जो सबसे बड़ी पहचान होता है,और मेरा विचार मेरा गांव सेवटा है,जो मुझे एक नई पहचान के रूप में खड़ा किया है, मैं अपने सेवटा गांव के पूर्वजों को प्रणाम करता हूं, और उनके आशीर्वाद की कामना करता हूं,विचार ही व्यक्ति का असली पहचान है यह हमारे किसी पूर्वज ने कहा जो मैं आप सबके सम्मुख रख रहा हूं,सच्चे विचार मानव को लक्ष्य तक पहुचा ने का मार्ग सीढी है…..!
धन्यवाद
राइटर:-इंजी.नवनीत पाण्डेय सेवटा(चंकी)

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ER.NAVANEET PANDEY
ER.NAVANEET PANDEY
Azamgarh
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नाम:- इंजी०नवनीत पाण्डेय (चंकी) पिता :- श्री रमेश पाण्डेय, माता जी:- श्रीमती हेमलता पाण्डेय शिक्षा:-...
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