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मेरा एक दोस्त खो गया है (नज़म )

Hardeep Bhardwaj

Hardeep Bhardwaj

कविता

April 13, 2017

पता नहीं कहाँ गुम है वक़्त की गलियों मे
वो ही गलियां जिनका शोर मुझे रात भर सोने नहीं देता
कैद है नीदें एक अरसे से किसी कारागाह मे
बिना उसके शरीर मानो बेजान सा हो गया है
मेरा एक दोस्त खो गया है
मेरा एक दोस्त खो गया है

वो गलियां तो आज भी वहीँ है
मुनासिब नहीं हुआ कुछ वहां
ऐसा लगता है वक़्त जाया कर दिया हमने
उसके बिना डर सा भी है सीने मे
उम्मीदें बिखरने लगी है रूह का
सुकून भी सो गया है
मेरा एक दोस्त खो गया है
मेरा एक दोस्त खो गया है

आखिरी बार जब मिला उस से
पूछ लिया था मैंने समझते क्या
हो तुम जिंदिगी से
बोला आँखे बंद हो तो ऐसा लगे
अब कुछ देखने को बाकी नहीं रहा
हवा के झोंके में उड़ते एक पत्ते ने कहा मुझसे
उसका भी एक दोस्त खो गया है
उसका भी एक दोस्त खो गया है

— हरदीप भारद्वाज

Author
Hardeep Bhardwaj
Software Developer by profession, Writer from my heart. Love English, Hindi and Urdu literature. Email: hardeepbhardwaj67@gmail.com
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