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मेरा एक दोस्त खो गया है (नज़म )

पता नहीं कहाँ गुम है वक़्त की गलियों मे
वो ही गलियां जिनका शोर मुझे रात भर सोने नहीं देता
कैद है नीदें एक अरसे से किसी कारागाह मे
बिना उसके शरीर मानो बेजान सा हो गया है
मेरा एक दोस्त खो गया है
मेरा एक दोस्त खो गया है

वो गलियां तो आज भी वहीँ है
मुनासिब नहीं हुआ कुछ वहां
ऐसा लगता है वक़्त जाया कर दिया हमने
उसके बिना डर सा भी है सीने मे
उम्मीदें बिखरने लगी है रूह का
सुकून भी सो गया है
मेरा एक दोस्त खो गया है
मेरा एक दोस्त खो गया है

आखिरी बार जब मिला उस से
पूछ लिया था मैंने समझते क्या
हो तुम जिंदिगी से
बोला आँखे बंद हो तो ऐसा लगे
अब कुछ देखने को बाकी नहीं रहा
हवा के झोंके में उड़ते एक पत्ते ने कहा मुझसे
उसका भी एक दोस्त खो गया है
उसका भी एक दोस्त खो गया है

— हरदीप भारद्वाज

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Harshvardhan Bhardwaj
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