मुक्तक

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मेघा छाए जब नील गगन ।
व्याकुल विरहन की व्यथा सघन।
जब विरहानल से तन दहके-
तब दग्ध हृदय होता न सहन।
-लक्ष्मी सिंह 💓 ☺

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