कविता · Reading time: 1 minute

मृत्यु जीवन का एक सत्य

कहते हैं
मृत्यु अंतिम सत्य नहीं है
जीवन यात्रा का अंत नहीं है
एक नई यात्रा का शुभारंभ है ।

सोचता हूँ
संभवतः ऐसा ही हो
ऐसा ही होता भी हो
उस गंतव्य तक पहुँचा नहीं हूँ ।

सत्य है
सभी पहुँचते हैं
एक दिन उस गंतव्य तक
लौट कर कोई बताता नहीं है।

विज्ञान मानता है
प्रत्येक द्रव्य अविनाशी है
आध्यात्म का उद्घोष है
प्रत्येक अस्तित्व क्षणभंगुर है ।

चाहता हूँ
उस परणिति तक पहुँचूँ
पहले इसके जान सकता मैं
नियति क्या है गंतव्य क्या है ।
अंतिम सत्य क्या है ।

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लेखन एक साधना है विगत 40 वर्ष से बाल्यावस्था से होते हुए आज लेखन चरम पर है । यूनियन बैंक मे कार्यरत के दौरान बैंक के मैगज़ीन, भारतीय रिजर्व बैक…
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