"मृत्युभोज"में कैसी मौज

मृत्यु भोज में कैसी मौज

क्या होता उस परिवार का,
जो देता मातम पर भोज।
और क्या कहना उस इंसान का,
जो खाकर करता मौज।।

कैसे समय गुजारा होगा,
उस परिवार ने बरसों से।
कोई बीमार कोई लाचार,
तंग आ गया होगा खर्चो से।।

कैसी प्रथा है यह,
ऐसा क्या रिवाज है।
निभाता जा रहा है कैसे,
क्या यही आधुनिक समाज है।।

बंद करो यह भोज व खाना,
शोकाकुल परिवार पर और ना भार धरो।
श्रद्धा सुमन अर्पित करो,
आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन धरो।।

कहे पा”रस आज हम नहीं रोक पाए तो ए कदम कौन उठाएगा, जब क्या मृत्यु भोज कराने के लिए भी कर्जा लिया जाएगा।

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मैं कोई कवि नहीं हूं, बस विचारों के प्रवाह को शब्दों में बांध लेता हूं,...
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