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मूँछेँ (सिर्फ एक मजाक)

आकाश महेशपुरी

आकाश महेशपुरी

कविता

September 17, 2016

मूँछेँ (सिर्फ एक मजाक)

सत्य कहूँ कि शान हैँ मूँछेँ।
मर्दो की पहचान हैँ मूँछेँ।।
अब तो ये फैशन है आया।
मूँछोँ का है हुआ सफाया।।
ये फैशन मूँछोँ पर भारी।
हैँ दिखते नर, जैसी नारी।।
मर्द हुए मेँहदी के आदी।
मूँछ मुड़ा के करते शादी।।

– आकाश महेशपुरी

Author
आकाश महेशपुरी
पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन पता- ग्राम- महेशपुर, पोस्ट- कुबेरस्थान, जनपद- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)
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