मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुहब्बत

कच्ची मिट्टी का आशियाना है
ढे़र हो गई सारी ही खुशियाँ हैं

मुहब्बत, है मुहब्बत का जख्म
खत्म सारी हो गई खुशियाँ हैं
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

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