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मुहब्बत होती है

बसंत कुमार शर्मा

बसंत कुमार शर्मा

गज़ल/गीतिका

June 13, 2017

स्वीट कभी नमकीन, मुहब्बत होती है
जग में बहुत हसीन, मुहब्बत होती है

थोड़ा थोड़ा त्याग, तपस्या हो थोड़ी,
फिर न कभी ग़मगीन, मुहब्बत होती है

चढ़ती है परवान, नाम दुनिया में होता,
जितनी भी प्राचीन, मुहब्बत होती है

होते हैं ठेकेदार, जहाँ पर जाति धर्म के
उनके लिए तौहीन, मुहब्बत होती है
कहीं न जाए टूट, सँभाले रखना तुम
डोरी एक महीन, मुहब्बत होती है

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Author
बसंत कुमार शर्मा
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन
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