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** मुहब्बत यूं बदनाम नहीं होती **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

August 10, 2017

चाहत कभी गुमनाम नहीं होती

राहे कभी सुनसान नहीं होती

होती चाहत तेरे दिल में मेरी

तो मुहब्बत यूं बदनाम नहीं होती ।।

?मधुप बैरागी

ऐ सूरज

ज़रा

कैफियत बरत

हम तो

ऐसे भी

इश्क में

तपाए हुए हैं

अपनी तपिस

को

सीने में

बचा के रख

आने वाली

सर्द में

काम आएगी ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more

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