मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई

ना पूछो यारो मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई
फ़ज़ीहत इसकी आजकल जमाने में आम हुई
जिस्म के भूखे है जो दरिंदे वो प्रेम क्या जाने
सुबह को मिले, शाम तक काम तमाम हुई !!
!
!
!
डी के. निवातिया

Like Comment 0
Views 216

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share