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मुहब्बत कहां है

Govind Kurmi

Govind Kurmi

कविता

January 27, 2017

हर जुबां पे जिसके चर्चे वो शोहबत कहां है

एक बात बता हमको की ये मुहब्बत कहां है

हर दर्द में हर प्यास में
हर अपने में हर खास में
मुहब्बत बेपनाह होती है, किसी से मिलने की आस में

इन अश्कों में और पानी में
इस जीवन में और रवानी में
मुहब्बत बेपनाह होती है, दादी नानी की कहानी में

भाई में और उसके प्यार में
बहिन में और मां के दुलार में
मुहब्बत बेपनाह होती है, पापाजी की मार में

हर किस्से में हर कहानी में
बचपन में भी और जवानी में
मुहब्बत बेपनाह होती है, मिलने की आनाकानी में

आराम में और सुकून में
हर शौक में हर जुनून में
मुहब्बत बेपनाह होती है, रगों में उबलते खून में

महबूब में और यार में
प्यारी बातों में तकरार में
मुहब्बत बेपनाह होती है, इन अश्कों के आबशार में

हर रिवाज में हर रीत में
हर भजन में और संगीत में
मुहब्बत बेपनाह होती है, मूरत से हुई उस प्रीत में

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Author
Govind Kurmi
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।