गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मुहब्बत इबादत मुहब्बत दुआ है

मुहब्बत इबादत मुहब्बत दुआ है
मुहब्बत के बल पर ज़माना खड़ा है

जो मेरा है वो भी न मुझको मिला है
यही भाग्य में मेरे शायद लिखा है

भला नींद आये तो आये भी कैसे
कि यादों का दिल में बवंडर मचा है

उड़ाने भरो शौक से तुम गगन में
मगर देख भी लो किधर की हवा है

करे शोक सपनों के मरने का कैसे
कि ये क़त्ल तो अपने हाथों हुआ है

बना लेना विश्वास की नींव पक्की
इसी पे तेरे घर का रिश्ता टिका है

न कहती किसी से भी कुछ ‘अर्चना’ अब
जुबाँ पे लगाना ही ताला भला है

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10-12-2019
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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