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मुस्क़ान तेरी ज़ादू

अरे!आँसू तो मोती हैं,गँवाया न कीजिए।
मुस्क़ान तेरी ज़ादू,छुपाया न कीजिए।।

सुनके उड़ाएँ न हँसी,यहाँ लोग ये तेरी।
खुद को कमज़ोर इतना,बताया न कीजिए।।

ये अंधों का शहर है,कभी भूल न जाना।
आईना हर किसी को,दिखाया न कीजिए।

धोखों के पहर में दिल,कहीं टूट न जाए।
विश्वास हर किसी संग,जताया न कीजिए।।

रोए बिना तो माँ भी,पिलाती दूध नहीं।
खामोशी में उम्मीद,जगाया न कीजिए।।

हुए चर्चे उन्हीं के,चले जो सफ़र यहाँ।
बिना बादल के बारिश,कराया न कीजिए।।

मोहब्बत दिले-ज़ुनून,मिला दे ख़ुदा यहाँ।
उम्मीदे-शम्मा कभी,बुझाया न कीजिए।।

प्रीतम दिल का जोश ही,बड़ा काम है करे।
इसको बढ़ने दीजिए,दबाया न कीजिए।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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