Jun 26, 2016 · कविता
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मुस्कुरा के जियो

डर के नहीं मुस्कुरा के जियो
प्यार को दिल में समों के जियो
हाथ थाम के कुछ बातें कहो
अपना किसी को बना के जियो
धीरे-धीरे जिंदगी गुजर जायेगी
मन में ना रह जाए बातें कहीं
धड़कनो को ना दबा के जियो
ये बीती शाम कल कहाँ आयेगी
इस पल की भी यादें रखते चलो
कुछ सूखी कुछ नम आँखों में
कहानी कोई बसा के जियो

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Dr. pragy Goel
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देह शब्द है भाव आत्मा यही समुच्चय मेरा परिचय View full profile
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