कविता · Reading time: 1 minute

मुस्कुराहटें

अपने आप में कुछ मर्म को समेटे हुये।
या अपनी मूक सहमति प्रकट करते हुए।
या कुछ निर्विकार निरापद सा भाव लिए हुए।
या कुछ प्रसन्नता का भाव प्रदर्शित करते हुए ।
या कुछ अंतः व्याप्त कुटिलता छिपा छद्म वेश लिए हुए ।
या प्रति आकर्षण का अस्त्र बनाए हुए।
या अंतर द्वंद को छुपाने का प्रयास करते हुए ।
या अपने दुःख को प्रकट न कर छुपाए रखते हुए ।
इन मुस्कुराहटों के बहु आयाम हैं ।
जिन्हें ताड़ पाना नही आसान है ।

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