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मुस्कुराने से

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

मुक्तक

May 6, 2017

????
मुस्कुराने से उम्र मेरी बढ़ती है ,
दुःख-दर्द और बीमारियां घटती है।

जिंदगी पल-पल ढलती है ,
रेत की तरह मुठ्ठी से फिसलती है।

ना जाने जिन्दगी का
कौन सा पल आखिरी है,

फिर क्यों न मुस्कुराते रहो,
जिंदगी तो एक बार ही मिलती है।
????- लक्ष्मी सिंह??

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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