मुस्कुराने लगेगी यही ज़िन्दगी

साथ में पग हमारे मिलाकर चलो
गीत गाने लगेगी यही ज़िन्दगी
गम के मौसम रहेंगे नहीं फिर यहाँ
मुस्कुराने लगेगी यही ज़िन्दगी

तान छेड़ी मुहब्बत की इस दिल ने है
बस तुम्हारी इबादत की इस दिल ने है
बात अपनी हमारे ही सुर में कहो
चहचहाने लगेगी यही ज़िन्दगी

प्यास दिल की बुझाये वो सावन नहीं
लग रहा अब हमारा कहीं मन नहीं
प्यार की कर दो बरसात यदि तुम प्रिये
लहलहाने लगेगी यही ज़िन्दगी

पालता स्वप्न रहता न जाने क्यों मन
जानता जब ज़माने का है ये चलन
कोई विश्वास टूटेगा यदि प्यार में
लड़खड़ाने लगेगी यही ज़िन्दगी

18-09-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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