Jul 29, 2016 · कविता

मुस्कुराना

तेरा ये रूठ कर मुस्कुराना
आँखों ही आँखों में कुछ कहना
मुझ नासमझ के समझ से पार है
बस हम तो इतना समझे
मामला या तो आर है
या पार है***

– दिनेश शर्मा

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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज...
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