" मुस्कराहट खा रही चुगली " !!

तैरते सपने दिखे हैं ,
Mail भी कितने लिखे हैं !
Pics भी इतनी बटोरी ,
भावना में सब बहे हैं !
बोल्ड हो गया कोई –
किसी ने डाल दी गुगली !!

नवल धवल प्यार है ,
खुशियों का उपहार है !
मिल गए हैं मन से मन ,
यों बहुतेरे इकरार हैं !
खूब बरतें सावधानी –
फिर भी उड़ चले गिल्ली !!

बढ़ गया विश्वास है ,
कुछ पाने का एहसास है !
उड़ने लगे हैं आसमां में –
अजीब सा आभास है !
रन दौड़ने में हैं जुटे –
मौसम हो रहा टल्ली !!

बृज व्यास

Like Comment 0
Views 360

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share