Aug 27, 2018 · गीत
Reading time: 1 minute

मुसाफिर

रुकना नहीं है तुझे
ए मंजिल के मुसाफिर
मुश्किल है माना
पर नामुमकिन कुछ नहीं

पत्थर भी चोट खा खाकर
शिवालय बनता है
चांद देख अंधेरे से कैसे लड़ता है

जरा चलने की तो ठान
तू चलेगा जिधर
खुलेगी राहे वहीं
मुश्किल है माना
पर नामुमकिन कुछ नहीं

6 Likes · 1 Comment · 42 Views
Copy link to share
नीलम
79 Posts · 3.2k Views
Follow 6 Followers
बहुजन हिताय बहुजन सुखाय View full profile
You may also like: