मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुलाकात

जीने के लिए एक मुलाकात काफ़ी है
मुस्कुराहट के पीछे इक मुस्कान काफ़ी है

गिले- शिकवे सब भूल जाने अच्छे हैं
मीठी बातें, यादों में बीते, मुस्कान काफ़ी है
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

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