मुलाकात

मुद्दतों बाद तुम अगर कहीं मिल जाओ तो
कदम तुम्हारे तब भी क्या लड़खड़ायेगे !
थरथराते होठों से उभरेगे क्या कुछ लफ्ज पुराने
निगाहें तुम्हारी क्या फिर मुड़ मुड़ जायेगी !!

उठती हुई हर मुस्कान को रोकेगे अन्दाज तेरे
निगाहों की सख्ती को तोड़ेगें ख्याल तेरे !
खामोशी तेरी बोलेगी या बोलेगी निगाहें
देखेगी आप मुझे या देखेगी यूँ ही नजारे !!

सामने होते हुए भी मैं ना बोलुँगा कुछ
धड़कने मैं सीने में सी लुँगा सब !
कम्पकम्पाएगे होठ तो नजरे घुमा लूगा
दिल के हर जख्म सीने में छुपा लुँगा !!

पहचानते हुए भी क्या तुम पहचानोगी मुझे
या जुल्फ के झटके से हटा दोगी तुम मुझे !
मैं खोजुगा तेरी आँखो में वो मुहब्बत पुरानी
पर तेरे साथ तो होगी कोई नयी कहानी !!

फिर धीरे से तुम मेरे बगल से निकल जाओगी
पर इन झुकी निगाहों को फिर ना उठा पाओगी !
चाल की हर जुम्बिश बतायेगी दिल के तूफान तेरे
दूर तक तुझे जाते हुए देखेंगे अरमान मेरे !!

निगाहो से तो तुम ओझल हो जाएगी
पर यादो के हुजूम में एक हलचल छोड़ जाओगी !
वक्त का एक छोटा सा टुकड़ा बन तुम
मेरे सीने में सदा के लिये ठहर जाओगी !!

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