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मुलाकात ऐसी हो

Govind Kurmi

Govind Kurmi

कविता

April 9, 2017

खिली चांदनी हो खुला आसमां हो
मिले हमतुम ऐसे की बेसुध जहां हो
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रंगी फिजायें और चंचल हवायें
हमे देखकर छुपके गुल मुस्कुरायें
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मुस्कुराहट इशारों में नैनों से बातें हों
पलों की नहीं सदियों की मुलाकातें हों
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धड़कनों की मर्ज़ीयां और वक्त थम जाये
सारी निकाहत आके तेरे दामन में रम जाये
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दिलों की शरारत और बेकाबू जज्बात हो
काश मेरे रब उनसे ऐसी भी मुलाकात हो
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Author
Govind Kurmi
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

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