कविता · Reading time: 1 minute

” मुन्शी प्रेमचंद जी की जयन्ती पर विशेष “

मुन्शी प्रेमचंद जी की जयन्ती (31 जुलाई,1880) पर विशेष।—

सन अट्ठारह सौ असी, जूलाई इकतीस।
जनमे “लमही” ग्राम, “बनारस” ज़िल्ले के नज़दीक।।

भले ग़रीबी मेँ पले, नाम था “धनपत राय”।
करुण कथा थी बचपना, कैसे कोउ बिसराय।।

मृत्यु पिता की जब हुई, जीना था, असहाय।
कोट, किताबें बेच दीँ, ट्यूशन से बस आय।।

लेखन मेँ थी गद्य के, मानो उनको सिद्धि।
“प्रेमचन्द” के नाम से, पाई जगत प्रसिद्धि।।

सामाजिक असमानता, पर था, तीक्ष्ण प्रहार।
बिरले ही, उन सा कोई, है लेता अवतार।

रोचक लिखीं कहानियां, नाटक अरु अनुवाद।
“उपन्यास-सम्राट” की, सदा रहेगी धाक।।

हिन्दी-उर्दू मिश्रित था, लेखन सबको ग्राह्य।
“निर्बल को न सताइये”, था उनका अभिप्राय।।

शब्द चुनिन्दा, हृदय पर, करते गहरी चोट।
थे समाज का आइना, कभी न लेते ओट।।

नमन आज करते उन्हें, श्रद्धा से परिपूर्ण।
“आशा”, युग-युग तक रहे, कीर्ति चक्र आघूर्ण।।

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रचयिता-

Dr.asha kumar rastogi
M.D.(Medicine),DTCD
Ex.Senior Consultant Physician,district hospital, Moradabad.
Presently working as Consultant Physician and Cardiologist,sri Dwarika hospital,near sbi Muhamdi,dist Lakhimpur kheri U.P. 262804 M.9415559964

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