कविता · Reading time: 1 minute

मुद्दे

मुद्दे रोज नये नये उठाते रहे
राम को तो कभी रहीम को जगाते रहे

रहता था जो रब दिलों में
उसे थपकिया दे कर सुलाते रहे

सोया था जो नाग दिलों में
उसे तुम खूब दूध पिलाते रहे

घर फूँक तमाशा देखने की जिद में
अपने स्वार्थों का अलाव जलाते रहे

जिन्दो को छोड़ उनके हालो करम पर
गढे मुरदों का मुद्दा उठाते रहे

मीनाक्षी दिल्ली

31 Views
Like
36 Posts · 1.4k Views
You may also like:
Loading...