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मुझे ज़िन्दगी तुम पढाते रहोगे…..

SUDESH KUMAR MEHAR

SUDESH KUMAR MEHAR

गज़ल/गीतिका

August 24, 2016

नज़र मुझसे यूँ ही मिलाते रहोगे,
मुझे ज़िन्दगी तुम पढाते रहोगे.
तुम्हारे ज़हन में हमेशा रहूंगा,
मुझे लिख के तुम जो मिटाते रहोगे
ये दुनिया तुम्हारे कदम चूम लेगी,
अगर तुम मुहब्बत लुटाते रहोगे.
ज़रा पूछ लो इन सियासत गरों से ,
कि मज़हब पे कब तक लड़ाते रहोगे.
कि साँसे कहाँ ले सकेंगे दुबारा,
हमे देखकर मुस्कुराते रहोगे.
दिलों में रहें हैं ठिकाने खुदा के
इमारत में कब तक बसाते रहोगे

………….सुदेश कुमार मेहर

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Author
SUDESH KUMAR MEHAR
ग़ज़ल, गीत, नज़्म, दोहे, कविता, कहानी, लेख,गीतिका लेखन. प्रकाशन‌‌--१. भूल ज़ाना तुझे आसान तो नही २--- सुनिक्षा [ग़ज़ल संग्रह ] 3---use keh to doo'n(Ghazal Sangrah)

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