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मुझे श्रेष्ठ होने का भ्रम था।

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

July 19, 2017

मुझे श्रेष्ठ होने का भ्रम था
ज्ञान कही कुछ कम था।
अपना देखा बेहतर माना
नही किया तुलना लोगो से।
देखा जब संसार घूमकर
पाया अपने को अंजाना
बेहतर सतत परिश्रम का फल है।
ठहर गये तो गिर जाओगे
सदा चले मंजिल पाओगे।
विन्ध्यप्रकाश मिश्र
विप्र

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Author
Vindhya Prakash Mishra
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ । चिंतनशील जीव होने के कारण कुछ न कुछ सृजित करता हूँ । पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में मनन... Read more

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