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मुझे बचपन जी भर जीने दे,,,,,,,,,

hritik kotle

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कविता

November 9, 2017

ऐ वक्त जरा तू धीमा चल , मुझे बचपन जी भर जीने दे ।
या यूँ कहूँ कि बस थम जा तू , मेरा मन नहीं भरता बचपन से ।

ये यादें मुझे संजोने दे , फिर माँ की गोद में सोने दे ।
जब जिद करके कुछ मांगू माँ से , फिर माँ से लिपटकर रोने दे ।

ऐ वक्त जरा तू धीमा चल,,,,,,,,,,

जो कभी थके नहीं मेरा बोझ उठाकर , अब कराह उनकी सुनता हूँ ।
मैं हर वक्त रहा जिनके साये में , अब दो पल को ना उनसे मिलता हूँ ।
उन आँखों में आशाएँ बहुत है , मत आँसू उनसे फिसलने दे ।
मुझे बनने दे बस उनका सहारा , चाहे दुनिया बदले बदलने दे ।
फिर ढलने दे हर शाम का सूरज , साथ में मेरे बाबा के ।
कहीं ठोकर खाकर गिर ना जाऊँ , फिर ऊँगली थाम के चलने दे ।

ऐ वक्त जरा तू धीमा चल,,,,,,,,

✍✍ — ऋतिक कोटले

Author
hritik kotle
I am a student of class 12th . I hope meri poems aapko pasand aayegi . aap sabhi isi tarah mujhe support kare . thank you
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