.
Skip to content

मुझे न गवारा कि बुजदिल कहाए

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

August 12, 2017

चलो अपना रास्ता स्वयं हम बनाएं
चले सही पथ पर बिना पल गंवाएं
जहां मे नही कुछ जो न मिल सके
ठोकर भी खाकर के खुशियां मनाएं
कही कुछ रुकावट तुम्हे आ मिलेगी
चलो ये रूकावट हवा मे उडाएं
बडी मौज है मुफलिसी मे जीकर देखो
कभी मक्खन सहित कभी सूखी ही खाएं
मगर स्वाभिमानी है पहचान खुद की
छोटी सी लालच मे यूं न गंवाए
बडो का कभी मित्र मुख न निहारे
समझो स्वयं को न लाचारा बनाएं
गिर गिरकर उठेगे चलते रहेगे
मुझको न गवारा कि बुजदिल कहाएं

विन्ध्यप्रकाश मिश्र नरई संग्रामगढ प्रतापगढ उ प्र 9198989831

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
Recommended Posts
नई सुबह - कहानी -- निर्मला कपिला1
नई सुबह - कहानी -- निर्मला कपिला1 आज मन बहुत खिन्न था।सुबह भाग दौड करते हुये काम निपटाने मे 9 बज गये। तैयार हुयी पर्स... Read more
*इन्विट्रो फर्टेलाईजेशन* के साईड एफेक्ट  पर एक कहानी
*इन्विट्रो फर्टेलाईजेशन* जैसे अविष्कार ने आज कल जिस तरह एक व्यापार का रूप ले लिया है,जैसे कि कुछ लोग तो सही मे औलाद चाहते हैं... Read more
मुझे तुमसे या दुनियां से गिला क्या ---- गज़ल -निर्मला कपिला
मुझे तुमसे या दुनियां से गिला क्या मिली तकदीर से हम्को सजा क्या बेटियां मां बाप से जब दूर जातीं बिना उनके जिगर मे टूटता... Read more
कहानी अनन्त आकाश --- कहानी संग्र्ह वीरबहुटी से
कहानी --- लेखिका निर्मला कपिला ये कहानी भी मेर पहले कहानी संग्रह् वीरबहुटी मे से है कई पत्रिकाओंओं मे छप चुकी है और आकाशवाणी जालन्धर... Read more