मुझे खेद है

मुझे खेद है उनके प्रति
जिनको कुत्तों से दोस्ती है
चील कौओं के जलसों से
जो होते है संबोधित,
जिनको गीदड़ में दिखता है
क्रांति का आह्वान
जिनको लोमड़ी में दिखता है
विकास …
विदेश की गौरियों में
जो पालते है
भारतीय संस्कृति के सुनहरे स्वप्न।

मुझे खेद है
उनके प्रति जो साँपों को
पिलाते है दूध में गुला विष
जो देते है प्रवचन
डसने के हुनर सीखने का,
धर्म की सीढ़ियों पर चलकर
जो बांटते है अशांति का प्रसाद।

मुझे खेद है
उनके प्रति जो करते है
नसबंदी की बाते
जिनको जनसंख्या की
शिकायत से ज़ुकाम है,
जो बेचते है मानवता के मर्म को
एक हरे नोट में
बिकता है सम्पूर्ण गुरु ज्ञान।

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