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मुझसी मेरी बेटी

*?मुझसी मेरी बेटी?*

नन्नी सी,,
प्यारी सी,,
दुलारी सी,,
करती घर मे ढेरो मस्तिया,,
मेरी बेटी मुझसी,,

दादा दादी की,,
नाना नानी की,,
परिवार की दुलारी की,,
माँ पापा के आखों का शुकुन,,
मेरी बेटी मुझसी,,

कभी फुदकती,,
कभी उछलती,,
फूल सी खिलती सी,,
यहाँ वहाँ घरआँगन क्यारी में,,
मेरी बेटी मुझसी,,

मासूम लवो से,,
बड़े बड़ो से,,
सच अपनो से,,
दिल की बात कह जाती,,
मेरी बेटी मुझसी,,

जिद भी कभी,,
आसमा से तारो अभी,,
कहती सभी से,,
को तोड़ लाने की करती,,
मेरी बेटी मुझसी,,

छुपके से आकर,,
कोने में जाकर,,
थोड़ा सा खाकर,,
आँचल में मेरे सो जाती,,
मेरी बेटी मुझसी,,

पापा के प्रति अटूट,,
विश्वाश,प्रेम कूट,,
खुशी पर लूट,,
हंसी का समंदर भरा उसके अंदर,,
मेरी बेटी मुझसी,,

पल भर के लिये,,
दूर कोई किये,,
दिल रो दिये,,
आंखों से ओझल न होने देती,,
मेरी बेटी मुझसी,,

बचपन की बाते,,
खेल की सौगाते,,
अनबन सी बातें,,
मुझ से वो पूछा करती,,
मेरी बेटी मुझसी,,

मन ही मन खूब,,
गुदगुदाया करती रूप,,
जल हलचल सा रूप,,
खुशी दे जाती है ,,
मेरी बेटी मुझसी,,

देख छुटपन की,,
नटखट बचपन की,,
तश्वीरो को रूप,,
थोड़ा शरमा कर खिलाकर,,
मेरी बेटी मुझसी,,

बेटी की ये खूबसूरत,,
लम्हे सुंदर मूरत,,
सोनु सोच सोच करत,,
कलम से कैद अपनी कविता,,
मेरी बेटी मुझसी,,

मेरी बेटी के समर्पित,,,
कलमसे,,,*सोनु जैन,,मंदसौर*

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