Skip to content

मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे- कुछ शेर

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

शेर

June 23, 2017

ऐसी लगी है आग सियासत की आजकल
मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे

************

बेसबब, बेचैन होकर, बह रही है जिंदगी
आजकल खुद से यहाँ, हर आदमी है लापता

************

मौत तो आनी है सबको एक दिन
मौत से पहले तू जीना सीख ले

************

बहुत से ऐब हैं मुझमें, बहुत सी खूबियाँ भी हैं
तुझे क्या चाहिए मुझमें, तेरा अपना नज़रिया है

************

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
बैतूल

Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....
Recommended Posts
*मुक्त-ग़ज़ल : रावण भी रहता है मुझमें !!
तू क्या जाने क्या है मुझमें ? सिंह है या चूहा है मुझमें !! इत सीतापति बसते हैं उत , रावण भी रहता है मुझमें... Read more
असर
नफरतो के असर दिखाई दे रहे है हर तरफ कहर दिखाई दे रहे है असर क्या हुआ जश्ने आज़ादी का लाशो के शहर दिखाई दे... Read more
दिल ये मेरी  नज़र कर दे
दिल ये मेरी नज़र कर दे मुझको मेरी ख़बर कर दे दीवाना तुझको सदा रखूं मुझमें ऐसा हुनर कर दे जब- जब याद तेरी आये... Read more
ग़ज़ल।दर्द के ऐसे निवाले पल रहे है आजकल ।
ग़ज़ल । दर्द के ऐसे निवाले पल रहे है आज़कल । सादगी मे लोग बेशक़ ढल रहे है आज़कल । बेवफ़ाई पर यक़ीनन कर रहे... Read more