मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे- कुछ शेर

ऐसी लगी है आग सियासत की आजकल
मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे

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बेसबब, बेचैन होकर, बह रही है जिंदगी
आजकल खुद से यहाँ, हर आदमी है लापता

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मौत तो आनी है सबको एक दिन
मौत से पहले तू जीना सीख ले

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बहुत से ऐब हैं मुझमें, बहुत सी खूबियाँ भी हैं
तुझे क्या चाहिए मुझमें, तेरा अपना नज़रिया है

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लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
बैतूल

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