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मुखौटा

preeti tiwari

preeti tiwari

कविता

September 30, 2016

नोंच लेती गर मुखौटा चेहरे पे होता
उसने पूरी शख्सियत पे पर्दा किया था

भारीभरकम शब्दो मे झूठ भांप मै लेती
पर उसने खामोशी से इजहार किया था

हर जख्म कबूल होता,हर दर्द सह मै लेती
पर उसने मेरे भावो का तिरस्कार किया था

क्या तमाशे है जहां के देख लो “प्रीति”
चीर गया दिल को ,जिसे दिल ये दिया था

Author
preeti tiwari
जज्बातो को शब्दो मे उकेरने का प्रयास है मेरी लेखनी ही मेरे होने का एहसास है
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