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मुक्ति

dr. pratibha prakash

dr. pratibha prakash

कव्वाली

July 31, 2016

कर्म योग्यता और संस्कार
सबसे ऊपर मेरा प्यार
निस्वार्थ प्रीत जो मन लाये
मैं मेरा उसका मिट जाये
चाहे कोई विकट हो
मेरा भक्त मुझे सुन पाए
इसीलिए विशिष्ट कहलाये
हर स्थिति में सैम रहकर
मेरे निकट सदा रह पाए
पूर्ण समर्पित जो भी रहता
मेरे ह्रदय वो बस जाये
श्रेष्ठ मानव तन पाकर ही
मेरी इच्छा से मेरी ओर आये
मेरी शरण जो रह पाए
महान अस्तित्व वो बन जाये
साकार रूप का प्यार आशीष
उचित समय पर समय बताये
जो नियमो पर चले चलाये
जन्म -मरण से मुक्ति पाए

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Author
dr. pratibha prakash
Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु... Read more

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