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मुक्ति (कविता)

Onika Setia

Onika Setia

कविता

March 12, 2017

ऐ मेरे पंछी!,
उड़ जा तू इस,
पिंजरे से ।
ऐ मेरे पथिक,
जा चला जा तू ,
इस किराये के मकान से,
. क्या रखा है यहाँ ?
जो रुका है तूें।
किस आशा से इधर ,
थमा है तू?
यहाँ तुझे कुछ भी,
मिलने वाला नहीं।
दुनिया में कोई तेरा,
क्या !
यह तुच्छ शरीर भी,
तेरा नहीं।
जा उड़ जा,
जा चला जा,
यहाँ तेरा कुछ भी,
तेरा अपना नहीं ।
और जो तेरा अपना नहीं,
उससे मोह कैसा !
कभी तो जाना ही होगा,
तुझे अपने स्वदेश।
इससे पहले के यह जगत,
तुझे भ्रमित कर देे।
तुझे तेरे मालिक से,
दूर कर दे।
तो उचित है यही,
की तू अभी चला जा।
जा चला जा ।

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Author
Onika Setia
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , दैनिक जागरण का जागरण -जंक्शन ब्लॉग, स्वयं... Read more

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