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मुक्तक

Kokila Agarwal

Kokila Agarwal

मुक्तक

January 4, 2017

ज्ञान पिपासा भोले पंछी चुग चुगके सब पान लिया
आत्मसात करके हृदय में पीड़ा को जैसे जान लिया
अक्षर अक्षर में बिंधी पीर थी पंछी ये न जान सके
करूण सुरो में भीगा कलरव पंछी ने दुख ज्ञान लिया।

कोकिला

Author
Kokila Agarwal
House wife, M. A , B. Ed., Fond of Reading & Writing
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