मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

देख उसको ख़ुदा सोचता रह गया
उसके होठों पे कुछ काँपता रह गया
जिस तरह जी सकें जिंदगी को जियें
आजकल बस यही फ़लसफ़ा रह गया।

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